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Home Loan Insurance: होम लोन का भी बीमा कराएं और निश्चिंत हो जाएं

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आम आदमी की जिंदगी में होम लोन एक बड़ा फैसला होता है और इसके लिए कमाई का बड़ा ईएमआई में देना पड़ता है। हालांकि जिंदगी के साथ जोखिम भी जुड़े हुए हैं और ऐसे में घर के कमाऊ सदस्य, जिसके नाम पर होम लोन है, अगर उसकी कारणवश मृत्यु हो जाती है तो परिवार दोहरे संकट में फंस जाता है। एक ओर परिवार चलाने के लिए पैसे की जरूरत होती है, दूसरी ओर घर की किस्त भी समय पर देनी होती है। ऐसे में अगर आप होम लोन लेते हैं तो उसका बीमा करा लेना भी समझदारी है, इससे आप अपने परिवार को हर मुश्किल से बचा सकते हैं।

होम लोन का बीमा ऐसे कराएं
एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार 20 से 40 लाख तक का होम लोन लेता है और उसकी मासिक किस्त लोन की समयावधि के हिसाब से 20 से 50 हजार रुपये तक आती है। होम लोन प्रोटेक्शन स्कीम एक टर्म इंश्योरेंस की तरह है, यानी बीमा की अवधि आप खुद तय कर सकते हैं। बीमा की अवधि के हिसाब से आपका प्रीमियम तय होता है। अगर लोन लेने वाले की मृत्यु हो जाती है तो बाकी की किस्त इसी बीमा के जरिये जमा हो जाता है और आपका घर सुरक्षित रहता है। अन्यथा  समय पर ईएमआई नहीं जमा करने पर बैंक आपके मकान को बाकी रकम की वसूली के लिए जब्त कर सकते हैं। अगर आपने होम लोन के लिए कोई गारंटी रखी है तो उसे भी बैंक भुना सकते हैं।

प्रीमियम जोखिम के हिसाब से
होम लोन की रकम और अवधि के साथ आपकी उम्र और कामकाज से तय होता है कि बीमा की राशि कितनी होगी औऱ उसका प्रीमियम कितना होगा। आपकी आज की आय और भविष्य में होने वाली आय पर भी निर्भर करता है। अगर आपने 20-25 लाख रुपये का लोन लिया है तो आपको एक या दो लाख रुपये बीमा के लिए देने पड़ सकते हैं। इसके लिए टर्म इंश्योरेंस की तरह सिर्फ एक बार प्रीमियम देना होता है। आप चाहें तो यह रकम अलग से दें या लोन की कुल राशि में जुड़वा लें और उस हिसाब से यह आपकी ईएमआई में से कटता रहेगा। हालांकि एकबारगी प्रीमियम देने वाले को सरेंडर की सुविधा भी कुछ शर्तों के साथ मिलती है। बैंकिंग के साथ बीमा सेवाएं देने वाले वित्तीय संस्थान होम लोन प्रोटेक्शन प्लान के ऑफर दे देते हैं।

कर छूट का भी लाभ उठाएं
आप होम लोन की तरह इसके बीमा पर भी आयकर की धारा 80सी के जरिये आय़कर छूट का लाभ भी उठा सकते हैं। हालांकि अगर आपने होम लोन प्रोटेक्शन कवर का प्रीमियम भी बैंक से लोन ले रखा है तो यह आपकी ईएमआई में जुड़ेगा और आपको ज्यादा लाभ नही होगा।

बैंक खुद देते हैं यह ऑफर
आप जिस बैंक से होम लोन लेते हैं, वह खुद लोन की मंजूरी के दौरान आपको प्रोटेक्शन कवर का ऑफर देते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि आप उसी बैंक से बीमा कवर भी लें, जिससे आपने होम लोन कराया है या करवाना हो। आप बाजार में तमाम कंपनियों के उपलब्ध प्रस्तावों का अध्ययन कर तय कर सकते हैं कि कौन आपको अच्छी सुविधा दे रहा है और कितनी किफायत में यह आपको मिल रहा है। आप चाहें तो प्रोटेक्शन कवर न भी लें, यह किसी भी तरीके से अनिवार्य नहीं है।

टर्म इंश्योरेंस से महंगा
होम लोन बीमा कवर हालांकि टर्म इंश्योरेंस से महंगा होता है। अगर आप पांच साल का टर्म इंश्योरेंस करवाते हैं तो होम लोन प्रोटेक्शन प्लान की तुलना में 30-40 फीसदी तक सस्ता होता है, लेकिन दोनों के अलग-अलग फायदे होते हैं। एक अंतर है कि होम लोन बीमा कवर सिर्फ पांच साल के लिए होता है और इसे दोबारा नवीनीकरण कराना पड़ता है। जबकि प्योर टर्म इंश्योरेंस प्लान ताउम्र काम करता है। अगर हम बीमा कवर को होम लोन में मिला देते हैं तो हमें उस पर भी ब्याज देना पड़ता है। टर्म इंश्योरेंस स्वाभाविक मृत्यु या योजना के एक साल बाद आत्महत्या के मामलों को भी कवर करता है।

तीन तरह का होम लोन बीमा
1. रिड्यूसिंग कवर प्लान – होम लोन की रकम के साथ बीमा कवर घटता चला जाता है

2. लेवल कवर प्लान- पूरी लोन अवधि के दौरान बीमा कवर समान रहता है

3. हाइब्रिड कवर प्लान- पहले साल पूरा कवर रहता है और बाद में लोन के साथ घटता है

ये भी जानें 
– अगर आप लोन को दूसरे बैंक में ट्रांसफर कराते हैं, प्रीपेमेंट या रिस्ट्रक्चर कराते हैं तो होम लोन इंश्योरेंस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता

– होम लोन किसी और के नाम शिफ्ट करते हैं या समय के पहले बंद करते हैं तो बीमा कवर खत्म हो जाता है

– स्वाभाविक मृत्यु या आत्महत्या के मामले होम लोन प्रोटेक्शन प्लान के दायरे में नहीं आते हैं

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